खूनी अस्पताल में नवजात की मौत पहले भी सुर्खियों में रहा है शिवाय नर्सिंग होम

धरती पर भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर अब पैसों की लालच में इंसानियत को शर्मसार कर रहे हैंउत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही का एक और दर्दनाक उदाहरण सामने आया है, जहां बाजपुर के एक निजी अस्पताल में डिलीवरी के दौरान एक मासूम नवजात की मौत हो गई।मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया और डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। खूनी अस्पताल मासूम की मौत से मचा हंगामा”ऊधम सिंह नगर के बाजपुर में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब चकरपुर रोड स्थित शिवाय नर्सिंग होम में एक नवजात शिशु की मौत हो गई।उत्तर प्रदेश के स्वार निवासी सुधीर कुमार की पत्नी श्वेता को शुक्रवार रात डिलीवरी के लिए इस नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। शनिवार दोपहर करीब साढ़े बारह बजे डिलीवरी के दौरान नवजात ने दम तोड़ दिया। मासूम की मौत से गुस्साए परिजनों ने अस्पताल में जमकर तोड़फोड़ की। दीवारों से लेकर खिड़कियों तक सब निशाने पर आ गए। गुस्से में डूबे लोगों ने आरोप लगाया कि डॉक्टर और स्टाफ की लापरवाही के चलते उनकी गोद सूनी हो गई।घटना की सूचना मिलते ही बाजपुर कोतवाली से एसएसआई जसविंदर सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया और नवजात के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। लोगों का कहना है कि ये पहली बार नहीं है जब इस अस्पताल से लापरवाही की खबरें सामने आई हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक स्वास्थ्य विभाग ने कोई सख्त कदम नहीं उठाया। सवाल यह है कि — जब तक जिम्मेदार अधिकारी नींद से जागेंगे, तब तक कितने और मासूमों की जान जाएगीधरती पर भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर अब पैसों के सौदागर बनते जा रहे हैं। जहां कभी इंसान की जान बचाना धर्म था, अब वहीं इलाज एक व्यापार बन चुका है। जनपद ऊधम सिंह नगर में ऐसे कई अस्पताल खुलेआम नियमों को ताक पर रखकर चल रहे हैं।हर बार किसी की जान जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग खानापूर्ति करता है, अस्पताल पर ताला लगाता है, लेकिन कुछ दिन बाद वही अस्पताल नए नाम से फिर शुरू हो जाता है। बाजपुर में मासूम की मौत इस पूरे सिस्टम की लापरवाही पर सबसे बड़ा सवाल है — क्या इंसानियत का ये कारोबार ऐसे ही चलता रहेगा? क्या हर बार किसी की जान जाने के बाद केवल नोटिस और जांच की खानापूर्ति होगी? कब जागेगा सिस्टम… और कब इन खूनी अस्पतालों पर गिरेगी सख्त कार्रवाई की गाज? क्योंकि जब तक प्रशासन नींद से नहीं जागेगा, हर जांच रिपोर्ट के नीचे किसी मां की चीख दबती रहेगी

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