रामपुर: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अज़म खान का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा हैअपने पुराने तेवरों में लौटते हुए अज़म खान ने एक कार्यक्रम में कहा जो मेरे साथ हो रहा है, ख़ता ये नहीं है… ख़ता है कलम, जिसे मैंने ठेले और रिक्शा वाले के बच्चों के हाथ में पकड़ाईराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अज़म खान का यह बयान उस अन्याय और उपेक्षा की तरफ इशारा है, जो उन्हें राजनीति में लंबे समय से झेलनी पड़ रही हैवे शायद यह बताना चाहते हैं कि गरीबों और वंचितों के लिए आवाज उठाने की सज़ा उन्हें भुगतनी पड़ रही हैअज़म खान का यह दर्द भरा बयान सुनकर सपा कार्यकर्ताओं में सहानुभूति की लहर दौड़ गई हैवहीं कुछ विरोधी दलों ने इसे “नाटकीय और आत्मदया भरा” बयान बताया हैसोशल मीडिया पर लोग इस बयान को “सच बोलने की सज़ा” कह रहे हैं।अज़म खान का यह वीडियो कई प्लेटफॉर्म पर वायरल हो चुका है।लोग उनकी बात से सहमति भी जता रहे हैं और सवाल भी उठा रहे हैं कि क्या “कलम” सच में समाज बदल सकती है











