रामपुर झोला छाप अस्पताल व डॉक्टरों की भरमार स्वास्थ्य विभाग खामोश जिम्मेदार कौन
रिपोर्ट गुलबेज़ खान आजाद
रामपुर में झोलाछाप अवैध अस्पतालों की बाढ़ आई हुई हैं। स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही के चलते रामपुर में फर्जी व झोलाछाप अस्पताल दिन दोगुनी रात चैगुनी तरक्की कर रहे हैं। इन अस्पतालों ने अब तक सैकड़ों बेगुनाहों की जिन्दगी को लील दिया हैं। सीएमओ ने पूरे जिले में बड़े पैमाने पर चलाये चैकिंग अभियान में 25 अस्पतालों को सील कर दिया हैं।
सवाल यह उठता हैं कि इतनी बड़ी संख्या में बिना लाईसेंस व मानकों के अस्पताल कैसे संचालित हो रहे थे। इन अस्पतालों के बारे में स्वास्थ्य विभाग को कोई जानकारी न हो ऐसा संभव नहीं हैं। शहर के अंदर बड़े पैमाने पर धडल्ले से चल रहे अवैध अस्पतालों पर अब तक आखिर कार्यवाही क्यों नहीं की गई। खैर स्वास्थ्य विभाग अपनी कुंभकरणीय नींद से जागा हैं तो बेगुनाह लोगांें की जिन्दगी भी बच ही जायेगी। रामपुर की मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने शहर सहित पूरे जिले में बड़े पैमाने पर चैकिंग अभियान चलाया हैं जो सराहनीय हैं। स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्यवाही से पता चलता हैं कि कितने बड़े पैमाने पर रामपुर में अवैध अस्पताल अपनी मनमानी कर रहे थे। अब स्वास्थ्य विभाग की नज़र ऐसे अस्पतालों पर टेढी हुंई तो हडकंप मचना स्वभाविक हैं। लोगों का कहना हैं कि स्वास्थ्य विभाग ने यदि पहले ही ऐसे ठोस कदम उठाये होते तो इन अस्पतालों में बेगुनाह लोगों की मौत नहीं होती। मासूम बच्चों की जिन्दगी से खिलवाड़ करने वाले इन अवैध अस्पतालों पर शिकंजा कसने के साथ-साथ इनके खिलाफ ठोस कानूनी कार्यवाही भी की जाये ताकि किसी बेगुनाह की मौत न हो। लोगों का कहना हैं कि सबसे बड़ा सवाल यह हैं कि यदि सीएमओ कार्यालय की नाक के नीचे इतने बड़े पैमाने पर बिना अनुमति या मानकों के अस्पताल लंबे समय से संचालित हो रहे थे तो क्या इसका जिम्मेदार केवल अस्पताल संचालक हैं स्वास्थ्य विभाग की कोई जवाबदेही नहीं हैं। ऐसे अवैध अस्पतालों से सालों तक सांठगांठ करने वाले विभागीय कर्मचारियों पर भी कोई कार्यवाही होगी या फिर कुछ समय बाद नई सेटिंग के साथ इन्हे दुबारा धंधा चलाने का वरदान दे दिया जायेगा। रामपुर में अवैध अस्पतालों का यह नेटवर्क पूरी तरह स्वास्थ्य विभाग की नाकामी दर्शाता हैं। लोगों ने डीएम से मांग करते हुए कहा कि ऐसे अस्पतालों के खिलाफ तो ठोस कानूनी कार्यवाही की जाये लेकिन इन अस्पतालों को संरक्षण देने वाले स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के खिलाफ भी ठोस कार्यवाही की जाये ताकि भविष्य में ऐसी कोई गलती न कर सकें।











