नोडल अधिकारी सुभाष चंद्र शर्मा ने ज्वालानगर स्थित निर्माणाधीन पानी की टंकी के निरीक्षण के उपरान्त मुख्य विकास अधिकारी रामपुर व मुख्य चिकित्साधिकारी रामपुर के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, मिलक पहुंचे और आमजन को दी जाने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया। इस दौरान महोदय ने सबसे पहले पैथोलॉजी कक्ष, आपातकालीन वार्ड, ओ.पी.डी. कक्ष, औषधि वितरण केंद्र तथा अन्य विभिन्न अभिलेखों का गहन निरीक्षण किया। रजिस्टरों में दर्ज मरीजों की संख्या, दवा वितरण की स्थिति तथा चिकित्सकीय जांच प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की।निरीक्षण के दौरान नोडल अधिकारी महोदय ने ओ.पी.डी. में आने वाले मरीजों की संख्या एवं उन्हें दी जा रही चिकित्सा सेवाओं के संबंध में भी प्रभारी चिकित्साधिकारी से जानकारी प्राप्त की।चिकित्साधिकारी ने प्रमुख सचिव महोदय को अवगत कराया कि प्रतिदिन पर्याप्त संख्या में मरीज ओ.पी.डी. में आ रहे हैं, जिन्हें आवश्यक परामर्श एवं दवाइयाँ समय से उपलब्ध कराई जा रही हैं। टी०बी० रोग नियंत्रण कार्यक्रम की प्रगति की भी जानकारी ली। प्रभारी चिकित्साधिकारी द्वारा बताया गया कि वर्तमान में 250 टी०बी० रोगी उपचाराधीन हैं, जिन्हें नियमित दवा और परामर्श प्रदान किया जा रहा है। अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी जीवन रक्षक दवाइयाँ, इंजेक्शन, ऑक्सीजन सिलिंडर एवं आवश्यक औषधियाँ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रखी जाएं, जिससे उपचार में किसी भी प्रकार की कमी न होने पाए।इसके उपरांत नोडल अधिकारी महोदय ने डॉक्टरों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की उपस्थिति, ड्यूटी रजिस्टर की जांच की तथा स्टाफ की तैनाती व्यवस्था के बारे में जानकारी प्राप्त की। निर्देश दिए कि सभी चिकित्सक एवं कर्मचारी निर्धारित समय पर उपस्थित रहें और मरीजों के साथ संवेदनशील व्यवहार करें।निरीक्षण के दौरान नोडल अधिकारी ने वार्डों में भर्ती मरीजों का हालचाल जाना एवं उनके तीमारदारों से भी वार्ता की। उन्होंने मरीजों से अस्पताल में मिल रही सुविधाओं, दवा उपलब्धता के संबंध में फीडबैक लिया। अस्पताल परिसर की साफ-सफाई, शौचालयों की स्थिति एवं पेयजल व्यवस्था का भी निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि अस्पताल में नियमित तौर पर सफाई हो, साथ ही वार्ड में भर्ती मरीजों को स्वच्छ बिस्तर, कम्बल एवं आवश्यक सुविधाएं समय से उपलब्ध कराई जाएं। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र आमजन के स्वास्थ्य की प्रथम कड़ी है। निर्देश दिए कि अस्पताल की सभी व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं जनसुलभ बनाया जाए, ताकि जनमानस को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा प्राप्त हो सके।











