सरकार कर रही है आशाओं का शोषण, चाहिए नियमित वेतन, पक्की नौकरी और सम्मान : रीता कश्यप

सरकार कर रही है आशाओं का शोषण, चाहिए नियमित वेतन, पक्की नौकरी और सम्मान : रीता कश्यप

• मजदूर अधिकारों पर आजादी के बाद का सबसे बड़ा हमला, 12 फरवरी की राष्ट्रव्यापी हड़ताल में पूरी ताकत से शामिल होगी उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन (ऐक्टू) रुद्रपुर गल्ला मंडी में प्रदर्शन करेंगी : अनीता अन्नाट्रेड यूनियन ऐक्टू से सम्बद्ध उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की बाजपुर ब्लॉक कमेटी ने 12 फरवरी की हड़ताल में जाने का चिकित्साधिकारी को दिया नोटिस।यूनियन की प्रदेश उपाध्यक्ष रीता कश्यप ने कहा कि, केन्द्र और राज्य सरकार आशा वर्कर्स को न्यूनतम वेतन और कर्मचारी का दर्जा नहीं देकर उनका आर्थिक शोषण कर रही है. जिस सरकार का काम अपने कर्मचारियों की शोषण से रक्षा का होना चाहिए वही उनका शोषण करे इससे अफसोसजनक बात और क्या होगी? भाजपा सरकार के राज में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का बजट भी लगातार कम किया जा रहा है जिससे आशाओं का शोषण और भी ज्यादा बढ़ गया है. उन्होंने कहा कि हड़ताल के माध्यम से राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा खटीमा में आशा यूनियन से डीजी हेल्थ के प्रस्ताव को लागू करने के वादे को अमली जामा पहनाने की मांग भी की जायेगी. आशाओं को नियमित वेतन,पक्की नौकरी और सम्मान से कम कुछ भी मंजूर नहीं. इसलिए 12 फरवरी की राष्ट्रव्यापी हड़ताल में आशाएं पूरी ताकत से शामिल होंगी।

उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन (ऐक्टू) की जिला उपसचिव अनीता अन्ना ने कहा कि, मोदी सरकार मजदूरों, महिला कामगारों के अधिकारों पर हमला कर रही है,आशा वर्कर्स की हालत सभी उत्पीड़ित श्रमिकों में सबसे ज्यादा खराब है. उन्हें तो श्रमिक का दर्जा भी नही दिया जाता, बंधुवा मजदूर की तरह काम लिया जाता है. आशा वर्कर्स पर सरकार नए नए काम का बोझ लगातार बढ़ाते जा रही है. शिशु मृत्यु दर कम करने में आशा वर्कर्स का बहुत बड़ा योगदान है, गर्भवती महिलाओं की देख-रेख के लिए आशाओं को आधी रात में भी बिना किसी विभागीय सहायता के दौड़ना पड़ता है. इसके बावजूद आशा वर्कर्स को वेतन देने के नाम पर सिर्फ नाममात्र की प्रोत्साहन राशि और कुछ योजनाओं का कमीशन दिया जाता है. यह खुला शोषण कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता है.उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन 12 फरवरी को ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत अखिल भारतीय आम हड़ताल में पूरी ताकत से शामिल होंगी । चार श्रम कोड वापस लेने, आशाओं को न्यूनतम वेतन 35000 हजार करने, आशा वर्कर्स कोे राज्य कर्मचारी का दर्जा व न्यनूतम वेतन देने, रिटायरमेंट के समय पेंशन, अस्पताल में सम्मानजनक व्यवहार, ट्रेनिंग स्वास्थ्य विभाग स्वयं कराए और एनजीओ का हस्तक्षेप बंद हो, ट्रेनिंग का प्रतिदिन न्यूनतम 500 रूपये भुगतान करने, सभी बकाया राशि का भुगतान करने, हर माह का पैसा हर माह खाते में डालने सहित अन्य मांगों को लेकर ट्रेड यूनियन ऐक्टू के नेतृत्व में आशा वर्कर्स रुद्रपुर गल्ला मंडी में प्रदर्शन करेंगी.इस दौरान प्रदेश उपाध्यक्ष रीता कश्यप, जिला उपसचिव अनीता अन्ना,ब्लॉक सचिव मातेश्वरी, राजरानी, पूजा, आरजू, सविता, परमजीत कौर, प्रेमा राना, कमलेश, अनीता, ऊषा रानी, रूबी, शाइस्ता, पिंकी, अनीता गुप्ता, निर्मला देवी, बबली शर्मा, बालावती, शशिवाला, रीता शर्मा, अर्चना निशा शर्मा, राजकुमारी, सरोज सक्सेना, रानी, मंजीत कौर, पूजा, सुमन सैनी आदि मौजूद रहे।

 

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